गोंदिया : ‘जिन्दगी के सफर में’ शीर्षक से ही पता चलता है कि लेखक ने अपनी जिन्दगी के विविध पहलुओं का पुस्तक में समावेश किया होगा। कवि व लेखक छगन पंचे छगन के लेखन की यह विशेषता है कि वे अपनी बात को बड़ी सहजता व अपने विशेष अंदाज के साथ रखते हैं। जिन्दगी के सफर में उनकी यह पुस्तक व्यंग्य तरंग व हास्य की अभिव्यक्ति पाठकों के लिए रूचिकर साबित होगी, ऐसे उद्गार मराठी- हिन्दी के वरिष्ठ कवि पत्रकार माणिक गेडाम ने यहाँ भिन्न भाषी साहित्य मंडल द्वारा आयोजित वरिष्ठ कवि लेखक श्री छगन पंचे छगन की पुस्तक जिन्दगी के सफर में का विमोचन करते हुए व्यक्त किये। वे आयोजित समारोह के प्रमुख अतिथि के रूप में बोल रहे थे। छगन पंचे छगन के अंगूर बगीचा मार्ग, गजानन कालोनी स्थित निवास पर आयोजित इस समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि प्रकाश मिश्रा ने की। बतौर विशेष अतिथि कवि एवं समीक्षक युवराज गंगाराम, कवि छगन पंचे छगन एवं समारोह संचालक वरिष्ठ कवि रूपचंद जुम्हारे मंच पर उपस्थित थे। अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के छायाचित्र के पूजनोपरान्त अतिथि स्वागत श्रीमती उर्मिला छगन पंचे, भूषण भवरे, लोकेश पंचे, निखिलेशसिंह यादव, चंद्रप्रकाश बनकर आदि ने किया। युवराज गंगाराम ने कहा कि कवि या लेखक को लेखन के साथ अध्ययन पर विशेष ध्यान देना चाहिए, तब ही उनकी रचनाओं में निखार आता है। लेखन रूखा सूखा न होकर पौष्टिक हलुआ की तरह होना चाहिये जो अपनी विशेषता से लोगों का दिल जीत ले। उन्होंने आशा व्यक्त की कि छगन पंचे छगन की पुस्तक निश्चित ही युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी होगी। साहित्य मंडल के संयोजक वरिष्ठ कवि गीतकार शशि तिवारी अपने काव्यात्मक अंदाज में श्री पंचे को बधाई दी। अध्यक्ष प्रकाश मिश्रा ने पंचे की इस पांचवी पुस्तक के प्रकाशन पर उनकी लेखन क्षमता एवंम काव्य प्रतिभा की सराहना करते हुए भिन्न भाषी साहित्य मंडल में उनके सहयोग को गौरव की बात निरुपित किया। पंचे ने प्रस्तावना में कहा कि अपनी ७५ वर्षीय जिन्दगी के सफर में जो कुछ देखा, महसूस किया उसे इस पुस्तक में संजोने का उन्होंने प्रयास किया है। उल्लेखनीय है कि पुस्तक का मुखपृष्ठ श्री पंचे के सुपुत्र लोकेश पंचे ने तैयार किया है जिसके लिए उनका भी स्वागत किया गया। इस विमोचन समारोह का आभार उर्मिला पंचे ने माना।
कवि-गोष्ठी में कवियों ने किया काव्य पाठ…
इस प्रसंग पर अल्पोहार पश्चात कवि गोष्ठी का शुभारंभ वरिष्ठ कवि शशि तिवारी के मधुर स्वरों में माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। जिसमें सर्वश्री निखिलेशसिंह यादव, पंकज अग्रवाल, किशनलाल सिंह गुरु, चंद्रप्रकाश बनकर, संतोष सिंह नैकाने, चिरंजीव बिसेन, सुरेन्द्र जगने, गोवर्धन बिसेन गोकुल, युवराज गंगाराम, माणिक गेडाम, प्रकाश मिश्रा, छगन पंचे छगन, रूपचंद जुम्हारे एवं शशि तिवारी ने हिन्दी, मराठी, पोवारी भाषा में लाजवाब कविताओं का पाठ किया। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि रूपचंद जुम्हारे ने, आरंभिक संचालन शशि तिवारी ने एवं अंत में आभार छगन पंचे छगन ने माना। इस अवसर पर सुनील जाधव सहायक ग्रंथपाल, सुनील भवरे, कवि मनोज बोरकर मुसव्विर, प्रशांत चौव्हान, गोपाल पुस्तोड़े सहित अन्य उपस्थित थे।





