Wednesday, August 19, 2026
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संतों को जाति के दायरे में न बांधें : प्रो. संजय देशपांडे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘वर्ष प्रतिपदा उत्सव’
​गोंदिया : जिन संतों ने संपूर्ण समाज को दिशा दी, उन्हें आज हमने केवल एक विशिष्ट जाति के दायरे में बांधकर रख दिया है। संतों के विचार वैश्विक थे, लेकिन आज प्रत्येक जाति के संगठन ने अपनी-अपनी जाति के संत को बांट लिया है। जब तक हम जाति-पाति की इस दीवार को गिराकर सामाजिक समरसता नहीं लाते, तब तक समाज में अपेक्षित परिवर्तन नहीं आएगा, ऐसा प्रतिपादन भारतीय विचार मंच के भंडारा विभाग संयोजक प्रो. संजय देशपांडे ने किया।
​वे 19 मार्च को गुरुनानक स्कूल के प्रांगण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, गोंदिया नगर द्वारा आयोजित ‘वर्ष प्रतिपदा उत्सव’ में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर मंच पर जिला संघचालक लीलाराम बोपचे, नगर संघचालक मिलिंद अलोणी और नगर सह-संघचालक डॉ. मुकेश येरपुडे उपस्थित थे। आगे बोलते हुए प्रो. देशपांडे ने डॉ. हेडगेवार के जीवन सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और इसे हमें ही आगे ले जाना है। डॉक्टर जी ने कोलकाता में चिकित्सा की शिक्षा लेते समय केवल डिग्री ही प्राप्त नहीं की, बल्कि क्रांतिकारियों के सशस्त्र आंदोलन में भी भाग लिया। 1920 के अधिवेशन के बाद देश की स्थिति बदलने के लिए उन्होंने 1925 में शून्य से संघ खड़ा किया। आज संघ जिस वटवृक्ष के रूप में खड़ा है, उसके पीछे अनेक प्रचारकों और निष्ठावान स्वयंसेवकों का बड़ा समर्पण है। 1975 के आपातकाल के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा झेली गई कठिनाइयों के कारण ही संघ आज इस शिखर पर पहुँचा है, ऐसा भी उन्होंने उल्लेख किया। संघ की नींव डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के विचारों पर टिकी होने की बात कहते हुए उन्होंने उनके जीवन चरित्र के अध्ययन के महत्व को रेखांकित किया। विपरीत परिस्थितियों में भी ध्येय के प्रति निष्ठा रखने वाले महान व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद और छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन के उदाहरण दिए। संघ के कार्यों से अनेक सामाजिक संस्थाएं खड़ी हुई हैं, जिसमें उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों का उल्लेख किया। निष्ठावान और समर्पित स्वयंसेवकों के कारण ही संघ कार्य का विस्तार हुआ है और समाज परिवर्तन की प्रक्रिया अधिक गतिमान हुई है, ऐसा उन्होंने बताया।
​देश की बदलती परिस्थितियों पर भाष्य करते हुए उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन और धारा 370 हटाने जैसी ऐतिहासिक घटनाओं ने भारत की राजनीति की दिशा बदल दी है और जल्द ही समान नागरिक संहिता आएगी, ऐसा विश्वास व्यक्त किया। देशपांडे ने “पंच परिवर्तन” की संकल्पना पर विशेष जोर देते हुए सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और स्वदेशी विषयों पर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने प्लास्टिक मुक्ति, जल संरक्षण जैसे उपक्रमों के माध्यम से समाज में जागृति निर्माण करने की आवश्यकता व्यक्त की। प्रत्येक व्यक्ति छोटा ही सही, पर एक अच्छा संकल्प कर उसका कार्यान्वयन करे, ऐसा कहते हुए उन्होंने संदेश दिया कि “एक दुर्गुण दूर कर एक सद्गुण अपनाने से समाज और राष्ट्र दोनों बदल सकते हैं।” इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और नागरिक उपस्थित थे।

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