Wednesday, June 24, 2026

गोंदिया में आदिवासी समाज का विशाल मोर्चा आज

बंजारा समाज को आदिवासी आरक्षण में शामिल करने के प्रयासों पर आदिवासी समाज का विरोध
गोंदिया : गोंदिया जिले में आदिवासी समाज की संयुक्त कार्य समिति की ओर से जिला परिषद भवन में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में आदिवासी समाज के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस बैठक में आमदार संजय पुराम की उपस्थिति में बंजारा समाज को आदिवासी आरक्षण में शामिल करने के प्रयासों पर आदिवासी समाज ने कड़ा विरोध जताया। आदिवासी समाज के हितों से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा के बाद यह तय किया गया कि यह मोर्चा किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं बल्कि आदिवासी भाइयों की एकता और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आयोजित किया जा रहा है। आमदार संजय पुराम ने पत्रकार सम्मेलन में बताया कि इस मोर्चे में जिले की 20 से अधिक आदिवासी संस्थाएं भाग लेंगी और लगभग 50 हजार आदिवासी नागरिक इसमें शामिल होंगे। बैठक की अध्यक्षता आमगांव देवरी विधानसभा क्षेत्र के आमदार संजय पुराम ने की, जबकि विशेष रूप से धनराज तुमडाम भी उपस्थित थे।जिलाध्यक्ष करण टेकाम के अनुसार, यह विशाल मोर्चा 6 अक्टूबर 2025 को गोंदिया में आयोजित किया जाएगा। जिले के प्रत्येक गांव से आदिवासी पुरुष, महिला, छात्र और वरिष्ठ नागरिक बड़ी संख्या में इसमें शामिल होंगे। आदिवासी समाज ने इस मोर्चे के माध्यम से राज्य सरकार से ‘छोटा बिंदू नामावली नियम लागू करने’ की ठोस मांग रखने का निर्णय किया है। आरक्षण बचाव कृती समिती के अध्यक्ष करण टेकाम तथा, बैठक में जिला परिषद सदस्य प्रीती ताई कतलाम, समाज कल्याण अध्यक्ष रजनी कुंभरे, विभिन्न छात्र संगठन और आदिवासी संघटनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इसके अलावा मान्यवर अनिल वट्टी, ऍड. विवेक धुर्वे, श्याम तोडसाम, छाया टेकाम, घनश्याम तोडसाम, राहुल येल्ले, पूजा धुर्वे, वैशाली पंधरे आदि भी मौजूद रहे। आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया कि धनगर, बंजारा और अन्य गैर-आदिवासी समाज को आदिवासी आरक्षण में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, हाल ही में राज्य सरकार द्वारा आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासियों को किराए पर देने के निर्णय से आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश उत्पन्न हुआ है। इंदिरा गांधी स्टेडियम से यह विशाल मोर्चा निकलेगा और जिला प्रशासन कार्यालय के सामने जाकर अपना निवेदन सौंपकर समाप्त होगा। आमदार संजय पुराम ने कहा कि यह जिला स्तर पर आदिवासी समाज की एकता और ताकत का प्रतीक होगा और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ाई का ऐतिहासिक चरण साबित होगा।

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