गोंदिया : गर्भवती महिला एवं माताओं के स्वस्थ जीवन के लिए देशभर में अनेक योजनाएं चलाई जा रही है. देश के नवसंजीवनी कार्य क्षेत्र के आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवाले परिवार के गर्भवती माताओं को आर्थिक लाभ देने के लिए केंद्र सरकार ने मातृत्व अनुदान योजना 25 जून 1995 में शुरू की है. इस योजना के तहत तीन वर्षों में जिले की 5,413 महिलाओं ने लाभ लिया है.
आदिवासी क्षेत्रों की माता व शिशु मृत्यु दर को कम करने के साथ-साथ आदिवासी लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति सुधारकर उनका जीवनमान बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य के चयन नवसंजीवनी आदिवासी गांव के लिए यह योजना चलाई जा रही है. जिले में 368 नवसंजीवनी आदिवासी गांव की गर्भवती के लिए मातृत्व अनुदान योजना नवसंजीवनी साबित हो रही है. योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए करीब के शासकीय अस्पताल के आशा, स्वास्थ्य व आंगनवाड़ी सेविकाओं से संपर्क करें. ऐसी अपील जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नितीन वानखेडे ने की है. मातृत्व अनुदान योजना गर्भवती माताओं की नियमित स्वास्थ्य जांच हो, उन्हें समय पर पर्याप्त भोजन मिले, गर्भावस्था के दौरान व बाद में उन्हें आराम मिले इस दृष्टि से चलाई जाती है. इस योजना में गर्भावस्था में 400 रु. व 400 रु. दवाई इस प्रकार प्रत्येक लाभार्थी को कुल 800 रु. का लाभ दिया जाता है. इस योजना का लाभ 2 जीवित बच्चे (दो जीवित बच्चे व वर्तमान में गर्भवती) रहने वाली आदिवासी महिलाओं को दिया जाता है. इस योजना के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक खाते के पासबुक के झेरॉक्स की कॉपी, गर्भावस्था पंजीकरण कार्ड, आयु एवं जाति प्रमाण पत्र तथा प्रसूति कार्ड आवश्यक है. इस योजना के तहत आदिवासी एवं अनुसूचित जनजाति की गर्भवती महिलाएं, सरकारी एवं गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में संस्थागत प्रसव कराने वाली महिलाओं को लाभ दिया जाएगा. इसी प्रकार दो जीवित बच्चों (2 जीवित बच्चे व वर्तमान में गर्भवती) वाली आदिवासी महिलाओं को लाभ दिया जाएगा.





