Monday, September 21, 2026
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जांच के आदेश के बाद पिंडकेपार का ‘ताला ठोको’ आंदोलन स्थगित

चार वर्षों के विकास कार्यों, निधि और दस्तावेजों की होगी गहन जांच; 23 सितंबर को प्रत्यक्ष स्थल निरीक्षण के आदेश
गोंदिया : तहसील के मौजा पिंडकेपार ग्राम पंचायत के पिछले चार वर्षों के विकास कार्यों, शासकीय निधि के उपयोग, आर्थिक लेन-देन तथा प्रशासनिक कामकाज की निष्पक्ष जांच के लिखित आदेश पंचायत समिति प्रशासन द्वारा जारी किए गए हैं। प्रशासन द्वारा शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आधिकारिक जांच समिति गठित किए जाने के बाद ग्रामीणों ने सोमवार, 21 सितंबर को ग्राम पंचायत कार्यालय पर प्रस्तावित ‘ताला ठोको’ आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। हालांकि, यह आंदोलन का अंत नहीं है। 23 सितंबर को होने वाली प्रत्यक्ष जांच के बाद ही आगे की दिशा तय होगी, ऐसा ग्रामीणों ने चेतावनी दी है।
प्राप्त जानकारी अनुसार, पिंडकेपार ग्राम पंचायत के पूरे कामकाज पर संदेह व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने 1 सितंबर को पंचायत समिति एवं जिला परिषद प्रशासन के समक्ष संयुक्त शिकायत दर्ज कराई थी। पिछले चार वर्षों के विकास कार्यों के बिल, वाउचर, कैशबुक, माप पुस्तिका (एमबी), मासिक एवं ग्रामसभा की कार्यवाही, बैंक पासबुक, अनुमान पत्र तथा मूल्यांकन की गहन जांच करने की मांग की गई थी। 15 सितंबर तक जांच प्रक्रिया शुरू नहीं होने पर 21 सितंबर को ग्राम पंचायत कार्यालय को ताला ठोकने की चेतावनी दी गई थी। इस पृष्ठभूमि में पंचायत समिति प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच के आधिकारिक आदेश जारी किए।
सहायक बीडीओ के नेतृत्व में होगी जांच..
पंचायत समिति के आदेश के अनुसार सहायक समूह विकास अधिकारी की अध्यक्षता में विस्तार अधिकारी (पं.) निमजे एवं विस्तार अधिकारी (पं.) तिडके की जांच समिति गठित की गई है। यह दल बुधवार, 23 सितंबर को दोपहर 12.30 बजे ग्राम पंचायत पिंडकेपार कार्यालय पहुंचेगा। यहां मूल अभिलेखों की जांच के साथ ही विकास कार्यों का प्रत्यक्ष स्थल निरीक्षण किया जाएगा। जांच के लिए सभी मूल रिकॉर्ड तैयार रखने के निर्देश ग्राम पंचायत प्रशासन को दिए गए हैं।
20 मुद्दों को लेकर कामकाज पर उठे सवाल…
31 अगस्त को आयोजित तहकूब ग्रामसभा में ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत की पारदर्शिता को लेकर करीब 20 मुद्दे उठाए थे। इनमें ग्रामसेवक की नियमित उपस्थिति, बायोमेट्रिक हाजिरी, मुख्यालय में निवास, 15वें वित्त आयोग सहित अन्य योजनाओं की निधि का खर्च, प्रत्यक्ष कार्य एवं माप, निविदा प्रक्रिया, घरपट्टी-पानीपट्टी वसूली, संपत्ति रजिस्टर, आवास योजना के लाभार्थियों का चयन तथा जलापूर्ति एवं स्वच्छता पर किए गए खर्च जैसे मुद्दे शामिल थे। ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि जनहित और पारदर्शी प्रशासन के लिए है।

आश्वासन नहीं, सीधे कार्रवाई की मांग…
जांच की तारीख और समिति निश्चित होने के कारण प्रस्तावित आंदोलन स्थगित कर दिया गया है। हालांकि, केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। विकास कार्यों की वास्तविक गुणवत्ता और आर्थिक लेन-देन की जांच होना जरूरी है, ऐसा ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है। अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की गई है।
आंदोलन में इनका रहा सहभाग…
इस आंदोलन में मनोज गणवीर, ग्राम पंचायत सदस्य शोभिकाताई बिसेन, रविंद्राताई वैद्य, अविनाश (सोनू) तुरकर, सुरेंद्र गेडाम, सम्यक गणवीर, गणेश तुलसीकर, राहुल उरकुड़े, दीपक कोहले, अरुण कापसे, तन्मय गबने, आशीष एसनसुरे, नवीन बडगे, पपेश्वर पटले, वैभव बडगे, साहिल मेश्राम सहित बड़ी संख्या में शिकायतकर्ता ग्रामीण शामिल थे। अब सभी की नजरें 23 सितंबर को होने वाली प्रत्यक्ष जांच पर टिकी हैं।

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